भारतीय उपभोक्ताओं के पास अब दोषपूर्ण उत्पादों और खराब सेवाओं के लिए न्याय पाने का एक सरल मार्ग है। 2019 का उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम व्यक्तियों को उपभोक्ता संरक्षण आयोगों के पास शिकायत दर्ज करने की अनुमति देता है, जिससे लंबी सिविल अदालती कार्यवाही से बचा जा सकता है। मामलों को मूल्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, ऑनलाइन फाइलिंग उपलब्ध है, जिससे शिकायतों का त्वरित समाधान मिलता है।

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